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चीन जिस वजह से था डरा हुआ, आखिरकार पीएम मोदी की इंडोनेशिया की यात्रा पर हो गया कुछ वैसा

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 5 दिवसीय पूर्वी एशियाई देशों के दौरे पर हैं, इन देशों में इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर शामिल हैं. भारत हमेशा से ही पूर्वी एशियाई देशों को तरजीह देता रहा है और अब पीएम मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति ने इन देशों के साथ भारत के रिश्तों को और भी मजबूत किए हैं. पीएम मोदी की इस यात्रा से चीन पहले से ही डरा हुआ है और यह पहली बार नही हुआ है कि जब भारत अपनी नीति के अनुसार कदम रख रहा हो और खलबली चीन में मची हुई हो. इससे पहले भी इस उपमहाद्वीप में भारत की किसी भी गतिविधि पर चीन कड़ी प्रतिक्रिया देता रहा है. भारतीय प्रधानमंत्री की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भी ड्रैगन की प्रतिक्रिया कुछ इसी तरह की है.

प्रधानमंत्री मोदी पूर्वी एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ: (image Source)

इंडोनेशिया ने सबांग बंदरगाह पर भारत की उपस्थिति को दी मंजूरी-

इंडोनेशिया ने सामरिक रुप से महत्वपूर्ण ‘सबांग बंदरगाह’ के आर्थिक और सैन्य इस्तेमाल की मंजूरी भारत को दे दी है. इस पर चीन प्रतिक्रिया देते हुए  कहा है कि भारत उससे बेवजह का टकराव मोल ले रहा है. दरअसल सबांग बंदरगाह भौगोलिक स्थिति के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह द्वीप सुमात्रा के उत्तरी छोर पर मलक्का स्ट्रेट के काफी करीब है. भारत की इस द्वीप पर उपस्थिति चीन के लिए एक बड़ा झटका है. चीन की हमेशा से ही विस्तारवादी नीति रही है और इसी कारण उसकी नजर इस बंदरगाह पर है. इसकी उपयोगिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि द्वितीय विश्वयुध्द में जापान ने इस द्वीप का उपयोग अपने जहाजों के लिए किया था. अब भारत की इस द्वीप पर उपस्थिति चीन के प्रभुत्व को इस क्षेत्र में काफी हद तक कम कर देगी. यही वजह है कि चीन डरा हुआ है.

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो के साथ प्रधानमंत्री मोदी: (Image Source)

सबांग बंदरगाह-

सबांग बंदरगाह भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह से 710 कि.मी. की दूरी पर स्थित है. यह द्वीप सुमात्रा के उत्तर में है और मलक्का स्ट्रेट के बिलकुल करीब है. इस क्षेत्र में समुद्र की गहराई 40 मीटर तक है जो पनडुब्बियों समेत हर तरह के जहाजों के रुकने के लिए उपयुक्त स्थान  है. इसके अलावा इसके काफी करीब से गुजरने वाला मलक्का स्ट्रेट भी एशियाई देशों के लिए काफी अहम है. चीन के समुद्री व्यापार का काफी हिस्सा इसी मार्ग से होता है, ऐसे में इस क्षेत्र में चीन को आंख दिखाना मतलब की उससे दुश्मनी मोल लेना है. हालांकि भारत का भी 40 फीसदी समुद्री व्यापार इसी मार्ग से होता है. ऐसे मे यह भारत के लिए भी यह काफी महत्वपूर्ण क्षेत्र है.

‘सबांग बंदरगाह’ पर जहाज: (Image Source)

भारत के परिप्रेक्ष्य  मे पूर्वी एशियाई देश और चीन –

चीन की दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के साथ संबंधों को लेकर इंडोनेशिया केन्द्र में रहा है. वह इन देशों में होने वाले हलचलों पर हमेशा सचेत रहता है और एक प्रभुत्व वाली राजनीति करता है. वहीं भारत के इन पूर्वी एशियाई देशों के साथ संबंध प्राचीन काल से ही अच्छे रहे हैं इसके साथ ही अब पीएम मोदी ने ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत इन संबंधों को और प्रगाढ़ करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. पीएम मोदी की यही पॉलिसी चीन को रास नही आ रही. यही कारण है कि भारत और चीन के अलावा अन्य पूर्वी एशियाई देश भी इस क्षेत्र को लेकर टकराव की स्थिति मे हैं.

दक्षिणी चीन सागर में चीन का एक पोत: (Image Source)

दक्षिणी चीन सागर में चीन की मौजूदगी और अन्य देशों पर इसका प्रभाव-

आपको बता दें कि दक्षिणी चीन सागर को लेकर दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में तनाव रहा है. चीन इस क्षेत्र में दावा करता आ रहा है जबकि ब्रूनेई, मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलींपींस,ताइवान और विय़तनाम भी इसे अपना क्षेत्र बताते रहें हैं. दक्षिणी चीन सागर का क्षेत्र काफी व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र है. जहां से प्रतिवर्ष 3 ट्रिलीयन अमेरिकी डॉलर के सामान गुजरते हैं ऐसे में ये सभी देश अपने-अपने हित के अनुसार इस क्षेत्र मे दावा करते रहे हैं. हालांकि चीन इस क्षेत्र में बड़ा देश होने के कारण अपना दबदबा कायम रखने मे काफी हद तक कामयाब रहा है.

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