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ब्रेकिंग : बंगाल के चुनावी नतीजे देखकर ममता के साथ-साथ राहुल-सोनिया भी दंग रह जाएंगी

पश्चिम बंगाल से अधिकतर हिंसा, लड़ाई-झगड़े की ख़बरें सामने आती रहती हैं. जब से वहां पर ममता बनर्जी ने सत्ता संभाली है तब से ऐसी खबरों में बढ़ोतरी देखी गई. अभी कुछ दिन पहले वहां पर एक दलित व्यक्ति की ह्त्या कर दी गई. इसके पीछे का कारण आपको हैरान कर देगा. दरअसल, यह व्यक्ति भाजपा का कार्यकर्ता था. ये बात विपक्षी दलों को पची नहीं और उसकी हत्या कर दी गई. हत्या करने के बाद शव को पेड़ से लटका दिया गया. इतना ही नहीं मृतक के पीठ पर एक पोस्टर भी चिपकाया. इस पोस्टर पर लिखा था, ‘बीजेपी के लिए काम करने का यही हश्र होगा.’ इस तरह की घटना से आप खुद समझ सकते हैं कि बंगाल में इस समय क्या हो रहा है. पश्चिम बंगाल में भाजपा के बढ़ते स्तर को देखकर विपक्षी दलों में बेचैनी होने लगी है. इस बात को आप चुनाव नतीजों के आधार पर भलीभांति समझ सकते हैं.
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पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव के नीतेजों की बात करें तो महेश्ताला विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में कोई उलटफेर नहीं हुआ और  ममता बनर्जी की सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल कर ली, लेकिन इस चुनाव की सबसे अहम बात यह रही कि भारतीय जनता पार्टी ने यहां पर सीपीएम और कांग्रेस की जोड़ी को पछाड़ते हुए खुद को दूसरे स्थान पर पहुंचा दिया. महेश्ताला के नतीजे की बात करें तो भाजपा ने यहां पर अप्रत्याशित तरीके से प्रदर्शन किया और सभी विपक्षी दलों को चौंकाते हुए 41,993 वोट हासिल कर लिए.

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक समय ऐसा था जब महेश्ताला को सीपीएम का गढ़ कहा जाता था और उसे हरा पाना विपक्षी दलों के लिए आसान काम नहीं था. 2011 तक इस सीट पर सीपीएम का ही कब्जा रहा. लेकिन इस साल फरवरी में कस्तूरी दास के निधन के बाद यहां पर हुए उपचुनाव में कस्तूरी के पति दुलाल दास ने 1,04,818 वोट हासिल कर 62,896 मतों के अंतर से जीत अपने नाम कर ली. उनकी इस जीत से बड़ी बात बीजेपी का दूसरे नंबर पर आना रहा.

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सबसे हैरानी वाली बात तो यह रही कि इस क्षेत्र में 22 प्रतिशत मुस्लिम वोटर होने के बाद भी भाजपा ने क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में कामयाबी हासिल की. बता दें कि भाजपा को यहां 2011 में 3,689 वोट मिले थे जबकि 2016 में 14,909 वोट हासिल किए. लेकिन इस बार उसने शानदार प्रदर्शन कर दिखाया क्योंकि उसने सीपीएम-कांग्रेस के गठजोड़ को पीछे छोड़ते हुए पिछले साल की तुलना में पौने तीन गुना ज्यादा वोट (41,993) हासिल कर लिया.

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बता दें कि सीपीएम-कांग्रेस की जोड़ी भी यहां नाकाम होती दिखी और उसके प्रत्याशी को मात्र 30,316 मत ही मिले. जिस तरह से परिणाम आए हैं उससे साफ़ है कि जल्द ही पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी का पत्ता कटने वाला है. जनता अब हिंसा से ऊब चुकी है और वह मोदी सरकार की नीतियों में रूचि दिखा रही है.

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