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सबको हंसाने वाले बीजेपी सांसद हुकुम देव नारायण ने संसद भवन में कुछ ऐसा कहा कि नम हो गई पीएम मोदी की भी आंखें

संसद भवन पूरी तरह से सांसदों से भरा पड़ा है. तमाम पार्टियों के सासंद लोकसभा भवन में उपस्थित हैं और उनके साथ ही सामने की दीर्घा में भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति, वैंकेया नायडु, देश को विकास की राह पर ले जाने वाले सभी देशवासियों के सबसे पसंदीदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोसकभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन भी मौजूद हैं. सामने की लाइन में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी बैठे नजर आ रहे हैं और विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद भी मौजूद हैं. जो संसद भवन आमतौर पर शांत नजर नहीं आता वो काफी ज्यादा शांत है.

मौका था देश के कुछ ऐसे सांसदों को सम्मानित करने का, जिन्हें सरकार द्वारा या कहें कि उनके बेहतर काम की वजह से उन्हें ‘उत्कृष्ट’ समझा गया है. अब सम्मानित करने की बारी आई है बीजेपी के एक ऐसे सांसद को जिनके नाम से लगभग हर कोई वाकिफ होगा. बिहार के मधुबनी से सांसद हुकुम देव नारायण ही वो सांसद हैं जिनको सम्मान देने की बारी आई है. धीरे-धीरे सांसदों की दीर्घा से उठकर वो सामने आए और वो अपनी स्पीच देने लगे. हुकुम देव एक मशहूर सांसद हैं और उन्हें मशहूर बनाया है उनके बात करने के तरीके ने और लोगों को समय-समय पर अपनी बातों से हंसाने का तरीके ने.

हंसाने के साथ-साथ लोगों को भावुक भी कर गए हुकुम देव

पिछले 42 सालों देश की सेवा में तत्पर हुकुम देव जब भी संसद भवन में अपना भाषण देते हैं, तो लोगों को अक्सर उनकी बाते सुनकर हंसते देखा गया है. वो बहुत ही मजाकियां अंदाज में अपनी बातों को सबके सामने रखते हैं और मजाक-मजाक में वो विपक्ष पर हमला भी कर देते हैं लेकिन, जब उन्हें ‘उत्कृष्ट’ सांसद के पद से सम्मानित किया गया तो वो थोड़े भावुक हो गए. इसी बीच उन्होंने हंसते हुए कहा कि, ‘ना मेरा बाप उत्कृष्ट, ना मेरी मां उत्कृष्ट. फिर मुझे उत्कृष्ट सासंद कैसे चुना गया?’

हुकुम देव नारायण के भाषण के दौरान पीएम मोदी कभी भावुक नजर आए तो कभी हंसते हुए भी

जब हुकुम देव नारायण अपना भाषण दे रहे थे तो वहां मौजूद सभी सांसद, चाहे पक्ष के हो या विपक्ष के, सभी लोग समय-समय पर तालियों के साथ उनकी बातों का स्वागत कर रहे थे. बीच-बीच में हुकुम देव कुछ ऐसी बाते भी बोल जा रहे थे, जिसे सुनकर सभी को हंसी आ रही थी. तो कभी-कभी वो भावुक होकर भी अपनी भावनाओं को प्रकट कर रहे थे. उनके भाषण के दौरान पीएम मोदी भी मुस्कुराते नजर आ रहे थे लेकिन, एक वक्त ऐसा भी आया था जब पीएम मोदी भी थोड़े भावुक हो गए थे.

पीएम मोदी भी हो गए भावुक

दरअसल, जब हुकुम देव नारायण ने पीएम मोदी के बारे में जिक्र करते हुए बोला कि, ‘जब एक गरीब मां-बाप का औलाद जो चाय बेचकर अपनी दिनचर्या चलाता था, वे आज देश के प्रधानमंत्री के पद पर बैठे हैं, तो हमारे जैसे लोगों को उत्कृष्ट सांसद का पद कैसे नहीं मिल सकता है’. इसके बाद उन्होंने कहा कि, ‘कैेसे आपने एक छोटे से गांव के किचड़ में से हीरे को पहचान लिया. अब तक ना जाने कितने पांव लगे, ठोकरें खाई. जब भी अपनी पत्नी के साथ बैठता था तो वो अक्सर वो पूछा करती थी कि, क्या आपको कभी उत्कृष्ट सांसद का पुरुस्कार मिलेगा? जवाब में मैं कहता था कि, कोशिश करूंगा, क्योंकि मेरी पत्नी भी राजनीति में काफी समय से सक्रिय हैं’.

जब एक मुस्लिम भाई को पद्म सम्मान मिल सकता है तो मुझे उत्कृष्ट सांसद का पुरस्कार क्यों नहीं- हुकुमदेव नारायण

हुकुम देव नारायाण को कहां से उत्कृष्ट सासंद की प्रेरणा मिली, इस बारे में जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि, ‘जब सिलिगुड़ी के एक मुस्लिम मजदूर भाई को पद्म सम्मान से सम्मानित किया गया तो मेरे अंदर ये भावना जगी कि, मैं भी उत्कृष्ट सांसद का पुरस्कार लेकर रहूंगा’. इसके बाद उन्होंने मजाकिया लहजे में बात करते हुए कहा कि,‘जब प्रधानमंत्री और पद्म सम्मान देने वाले लोग इतनी दूर से सिलिगुड़ी के मुस्लिम भाई को खोजकर निकाल सकते हैं पुरस्कार देने के लिए तो मैं तो दिल्ली में उनके सामने ही होता हूं. मुझे तो पुरस्कार मिल ही जाएगा’.

हुकुम देव नारायण अपने मजाकिया अदांज के लिए ज्यादा मशहूर हैं लेकिन, उत्कृष्ट सांसद का पुरस्कार लेते समय एक पल के लिए वो भी भावुक हो गए थे(image source: Jansatta)

अंत में उन्होंने अपने प्रेरणास्रोत के बार में बताते हुए कहा कि, ‘मैं राम मनोहर लोहिया जी को भी मानते हैं और पिछले कई सालों से संघी भी हूं. तो ऐसे में लोगों को लगता था कि, मैं समाजवादी भी हूं और संघी भी’. अंत में उन्होंने सभी को धन्यवाद दिया और चले गए.

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NEWS SOURCE: Jansatta