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डॉलर-रुपये अंतर पर सवाल पूछने वालों को ZOOM करके देखने चाहिए ये आंकड़े, बोलती हो जाएगी बंद

डॉलर के मुकाबले भारतीय रूपये में गिरावट आई है. ये गिरावट बढ़ी है तो डॉलर के मुकाबले रूपये 70 के पार पहुंच गया है. बताया जा रहा है कि डॉलर के मुकाबले रूपये में यह अब तक की सबसे बड़ी गिरावट आई है. इस गिरावट को लेकर विरोधी पार्टियों के नेता झूम रहे हैं और मोदी सरकार को घेरने की कोशिश में लगे हुए हैं. डॉलर के मुकाबले रूपये में हो रही गिरावट पर कांग्रेस मोदी सरकार पर जमकर निशाना साध रही है. इतना ही नहीं कुछ लोग तो पीएम मोदी से इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं.

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जानकारी के लिए बता दें इस बात में कोई दो राय नहीं है कि रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है. मगर आज हम आपके लिए ऐसे कुछ आंकड़े लेकर आये हैं, जिन्हें देखने के बाद विरोधियों के तो मुंह पर ताला लग जायेगा ही लेकिन आप भी यही कहेंगे कि मोदी सरकार पर निशाना साधना सही नहीं है. जी हाँ आज हम आपको कुछ देशों की मुद्रा के मुकाबले डॉलर की कीमत की सूची लेकर आये हैं, जिसमें 5 साल पहले यानि कि 2013 और 2018 के आंकड़े हैं. 2013 में कांग्रेस की सरकार थी, उस दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले कितना कमजोर था, ये हम आपको बतायेंगे. इस तस्वीर को गौर से देखें, ये आंकड़े आपको भी सोच में डाल देंगे.

अब जरा इन आंकड़ों पर आप नजर मारिये, जिसमें कई देशों के करेंसी और डॉलर के बारे में बताया गया है कि वह 2013 में कितना था और अब कितना है. सबसे पहले हम बात करेंगे रूसी रूबल की. रूस दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. सूची में आप देख सकते हैं कि एक डॉलर की तुलना में साल 2013 में रूसी रूबल 33.29 के बराबर था, जोकि अब यानि साल 2018 में 68.31 रूबल के बराबर है. अगर देखा जाए तो रूबल-डॉलर के मुकाबले में दोगुने से भी ज्यादा उछाल आया है. इसी तरह अगर आप हंगरी की फ़ोरिंट (करेंसी) के बारे में भी देख सकते हैं जोकि 2013 में 228.90 था मगर साल 2018 में 280.25 पर आ गया है. वहीँ इसके बाद श्रीलंकाई रुपये को आप देख सकते हैं जोकि साल 2013 में 132.96 था मगर अब डॉलर के मुकाबले 160.77 हो गया है.

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अब हम भारत की बात करें तो 2013 यानि कि UPA की सरकार में डॉलर के मुकाबले रुपया 65.71 था जोकि अब साल 2018 में 70.75 पहुंच गया है. जैसा की आपने सूची में देखा, लगभग सभी देशों की करेंसी में डॉलर के मुकाबले गिरावट आई है. कुछ देशों में तो यह उछाल दोगुने से भी ज़्यादा रहा है. हालांकि भारत का रुपया 5 साल में 5 रूपये ही कमजोर हुआ है. इसके बावजूद भी मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की जा रही है. यहाँ पर गौर करना ज़रूरी है कि करेंसी में गिरावट अंतराष्ट्रीय हालातों पर निर्भर करती है और आंकड़ों की माने तो यह गिरावट बेहद चिंतनीय नहीं है और समय के साथ यह भी बदलेगी. अब आगे देखिये रघुराम राजन ने गिरावट पर क्या कहा है.

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RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन जिन्हें कांग्रेस ने ज्यादा वरीयता दी थी उन्होंने भी डॉलर के मुकाबले गिरते भारतीय रूपये को लेकर जो कहा है, जानकर कांग्रेस सन्न रह जाएगी. RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम ने कहा है कि रुपया अभी इतने नीचे आ गया है लेकिन इससे कोई चिंता की बात नहीं है. मोदी सरकार को उन्होंने सलाह दी है कि सरकार बढ़ते चालू खातों का ध्यान रखे. डॉलर के मुकाबले घटते भारतीय रूपये के पीछे उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में ऊँची तेल कीमतों को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा है कि जीडीपी के हिसाब से देखा जाए तो भारत 7.5 फीसदी की दर से आगे बढ़ रहा है. यह भारत के लिए एक बड़ी बात है.

खुद राजन ने भी इस बात को बढ़ावा दिया है कि यह कोई चिंता का विषय नहीं है. ऐसे में विरोधियों द्वारा सरकार पर किये जा रहे हमलों को ये आंकड़े एक करारा जवाब है.