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जब मुनी तरुण सागर के कहने पर आरएसएस ने अपने यूनीफोर्म में किया था बदलाव, जानिए क्या हुआ था

साल 2018 देश के लिए बेहद ही अशुभ साबित हुआ है. इस वर्ष देश की कई महान हस्तियों ने हम सब को अलविदा कहा है. यह सिलसिला अभी थम नही रहा है. इसी कड़ी में देश की एक और महान हस्ती ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है. जी हाँ 51 वर्ष की उम्र में भावशाली जैन मुनी तरुण सागर का शनिवार को निधन हो गया है. उन्होंने पूर्वी दिल्ली के कृष्णा नगर राधापुरी के जैन मंदिर में एक लंबी लड़ाई लड़ने के बाद अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर आने के बाद हर तरफ शोक की लहर दौड़ गयी क्योंकि वह एक महान पुरुष थे.

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जानकारी के लिए बता दें कि जैन समुदाय के साथ देश-दुनिया में अपने विचारों को लेकर मुनी तरुण सागर ने एक ख़ास पहचान बनाई थी. इतना ही नही उनके राष्ट्रवादी विचारों ने देश के महान लोगों के साथ आरएसएस जैसे संगठन को काफी प्रभावित किया था. वे अब हमारे बीच नही रहे हैं लेकिन उनके महत्वपूर्ण योगदान को भुलाया नही जा सकता है. आरएसएस जैसे संघ को उन्होंने एक ऐसा ज्ञान दिया था, जिसके बाद आरएसएस ने अपने यूनीफोर्म में खास बदलाव किया था.

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जैन मुनी तरुण सागर साल 2011 में आरएसएस के विजयी दशमी समारोह में भाग लेने पहुंचे हुए थे. वहां पहुंचने के बाद उन्होंने आरएसएस की वर्दी देखी और सुझाव दिया कि वे चमड़े की बेल्ट से दूर रहें और इसका उपयोग नही करें जिससे जानवरों की हत्या को रोकने में मदद मिलेगी. यह अहिंसा के विपरीत है. उनके सुझाव से प्रेरित होकर आरएसएस ने अपनी यूनीफोर्म में बदलाव किया था. बता दें कि साल 1973 में आरएसएस की यूनीफोर्म में तीसरा बड़ा बदलाव लाइटर जूते पेश करने पर हुआ था, फिर उसके बाद जैन मुनी के कहने पर चमड़े की बेल्ट को लेकर रातों-रात बदलाव कर दिया गया था. जैन मुनी के कहने के बाद आरएसएस ने चमड़े की बेल्ट की जगह कैनवस की बेल्ट पहनना शुरू कर दिया था.

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अब उनके निधन के बाद आरएसएस और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से शोक व्यक्त किया गया है, आरएसएस ने अपने बयान में कहा है कि “तरुण सागर के निधन हमारे लिए काफी दर्दनाक रहा है. उनकी मृत्यु ने पूरे भारत को तो दुःख दिया ही है साथ में आरएसएस के लिए गहरा दुःख दिया है. उनके कड़वे बोल और उपदेश ने हर समुदाय को एक दिशा दी थी.” पीएम मोदी, हरियाणा के सीएम खट्टर और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जैसे कई बड़े नेताओं ने उन्हें बहुत सम्मान दिया था. वह 26 जून 1967 को मध्य-प्रदेश के दाहोह जिले में पैदा हुए थे.

उनके निधन पर पीएम मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए लिखा है कि “मुनी तरुण सागर जी महाराज के असामयिक निधन से गहरी पीडा है. हम उन्हें हमेशा अपने समृद्ध आदर्शों, करुणा और समाज में योगदान के लिए याद करेंगे. उनकी महान शिक्षाएं लोगों को प्रेरणा देती रहेगी.”