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लोगों के साथ मिलकर करता रहा बाढ़ पीड़ितों की मदद, लेकिन जब इसकी असली पहचान आई सामने तो सब चौंक गये

जब केरल बाढ़ से पूरी तरह परेशान था, पूरा देश केरल में आई बाढ़ को लेकर चिंतित था, उस समय सरकार केरल में राहत बचाव काम पर ज़ोर दे रही थी. केरल में आई बाढ़ में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाने की हर संभव कोशिश कर रही थी. वहीँ देश के विपक्षी नेता सरकार द्वारा जारी किया गये आर्थिक मदद को लेकर राजनीति कर रहे थे. इसी बीच की एक ततस्वीर सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आई है जिसे देखने के बाद आपको भी गर्व होगा.

Source-NDTV.com

जानकारी के लिए बता दें कि केरल में आई भयावह बाढ़ से पूरा देश परेशान था. लोग अपने अपने स्तर पर मदद के लिए हाथ बढ़ा रहे थे. हालाँकि इस समय सोशल मीडिया के माध्यम से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने हर किसी को चौंका दिया है. केरल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए एक नवयुवक जी जान से मेहनत कर रहा था. लोगों के पास खाद्य सामग्री पहुँचाने की कोशिश कर रहा था लेकिन जब इस युवक की सच्चाई सामने आई तो हर कोई हैरान रह गया.

दरअसल 2012 बैच के आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 26 अगस्त को केरल पहुँच गये थे. दादरा और नगर हवेली में कलेक्टर के पद पर तैनात कन्नन अपनी पहचान छिपाकर केरल में बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहे थे. इसी बीच जब एर्णाकुलम के जिला कलेक्टर वाई सफीरुल्ला एक प्रेस कलेक्शन सेंटर का दौरा करने पहुंचे तो उन्होंने कन्नन को पहचान लिया और लोगों को बताया कि वे कोई साधारण इंसान नही बल्कि कलेक्टर हैं. 32 वर्षीय कन्नन ने बताया कि अपने राज्य की हालत देखकर जब उन्होंने छुट्टी के लिए अप्लाई किया था तो सीनियर अधिकारीयों ने सकरात्मक रुख दिखाते हुए उन्हें छुट्टी की जगह ड्यूटी के लिए ही भेज दिया.

कन्नन ने बताया कि अधिकारियों और स्थानीय लोगों की मदद से उन्होंने 10 ट्रक खाने का सामान यहाँ तक लाने में कामयाब रहे. यहाँ पहुचकर उन्होंने अपनी पहचान छिपाकर लोगों की मदद करने का फैसला लिया. सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आई कन्नन के इस कार्य की आज चारों तरफ जमकर तारीफ हो रही हैं. ट्विटर पर आईएएस एसोसिएशन ने लिखा कि – “अविश्वसनीय कन्नन, आपके जैसे आईएएस अधिकारियों पर गर्व है- जो वास्तव में भारतीय प्रशासनिक सेवा का प्रतीक हैं”.

कन्नन के इस कार्य की सराहना ज़रूर पीएम मोदी भी करेंगे. इन्हें हमारा सलाम.

Source-jansatta