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केजरीवाल के इस ‘कारनामे’ ने देशभर में करवा दी उनकी किरकिरी, सारी राजनीति पर फिर गया पानी !

अरविंद केजरीवाल का दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने का सफर बड़ा ही मुश्किलों भरा रहा है. लंबे संघर्ष और जद्दोजहद के बाद मुख्यमंत्री बनने वाले अरविंद केजरीवाल को अपना ही पिछला सफर भूल गया. दरअसल यह मामला ऐसा ही संघर्ष करने वाले खिलाड़ियों को लेकर है जो देश के लिए कड़ी मेहनत के बाद मेडल जीत कर लाते हैं लेकिन उन्हें यहां कोई इज्जत नही दी जाती है. इस समय दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल एक ऐसे ही मामले को लेकर खिलाड़ियों के साथ ही विपक्षी नेताओं के निशाने पर हैं. उन्होंने कुछ ऐसा कर दिया कि उनकी पूरे देश में किरकिरी हो रही है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल: (Image Source-Jagran)

एशियन गेम्स की मेडलिस्ट ने केजरीवाल पर लगाए मदद न करने का आरोप

इंडोनेशिया में हाल ही में खत्म हुए एशियन गेम्स में भारत की दिव्या काकरन पदक जीत कर लौटी हैं. उनके अलावा मैडल जीतने वाले अन्य खिलड़ियों को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सम्मानित कर रहे थे और खिलाडियों से बातचीत कर उनकी समस्य़ाएं भी सुन रहे थे. इस दौरान पहलवान दिव्या काकरन ने अरविंद केजरीवाल को खिलाड़ियों को हो रही असुविधा को लेकर जमकर सुनाई. उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल फोन तक रीसीव नही करते. उन्होंने केजरीवाल पर खेल को लेकर मदद न करने का आरोप लगाया.

अरविंद केजरीवाल दिव्या काकरन को सम्मानित करते हुए: (Image Source-Oneindia)

 

काकरन ने आरोप लगाया कि जब कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मैडल जीत कर आई तब भी मेरे लिए कुछ नही किया गया. जिस समय मदद की जरुरत थी सीएम ने कुछ नही किया. काकरन ने कहा कि कॉमनवेल्थ में मैडल जीतने के बाद भी सीएम ने बुलाया था. मैने कहा कि ‘एशियन गेम्स में तैयारी के लिए मदद चाहिए मैनें पत्र लिख कर जरुरत बताई उसके बाद जब बात करना चाहा तो फोन तक नही उठाया गया.’

दिव्या काकरन ने केजरीवाल को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि आज जब आगे बढ़ गए हैं तो आपने बुलाया है. लेकिन जब मदद की जरुरत थी तब कोई सामने नही आया. मेरा यह कहना है कि गरीब बच्चों की मदद की जाय.

दिव्या काकरन पदक जीतने के बाद: (Image Source-Jagran)

 

दिव्या के इस आरोप के बाद अरविंद केजरीवाल चारों तरफ से घिरे नजर आ रहे हैं. सबसे बड़ी बात यह कि जो लोग केजरीवाल को संघर्ष करने वालों का नेता मानते हैं और यह मानते हैं कि वह गरीब और मेहनत करने वालोंं की मदद करते हैं दिव्या के इस आरोप के बाद उनके संघर्षों की सारी कहानी और राजनीति पर पानी फिरता नजर आ रहा है.

किसी भी गेम्स में खिलाड़ी कड़ी मेहनत औऱ संघर्ष के बाद पदक जीत कर लाते हैं और उसके बाद भी उनकी अनदेखी की जाती है. पहले तो खिलाड़ियोें को कोई मदद नही की जाती और जब वह पदक जीत कर लाते हैं तो राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए उन्हेंं पुरस्कारों की घोषणा की जाती है.

आपसे एक सीधा सवाल

खिलाड़ियों के इस तर्क से आप कितने सहमत हैं?

News Source-Jagran