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बड़ी खबर: चीन ने फिर एक घटिया चाल चली है, अब नेपाल को भारत से अलग करने के लिए कर रहा है कुछ ऐसा कि…

डोकलाम के बाद चीन और भारत के बीच आपसी रिश्ता काफी हद तक ठीक हुआ था लेकिन लगता है कि चीन अपने घटिया हरकतों से बाज नही आने वाला अब उसने भारत को एक बार फिर नीचा दिखाने की शर्मनाक हरकत की है. दरअसल चीन भारतीय उपमहाद्वीप के देशों में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए भारी-भरकम कर्ज बांटने के साथ ही अपने संसाधनों का इस्तेमाल करने की भी इजाजत दे रहा है. इसी कड़ी में अब चीन नेपाल को भारत से अलग-थलग करने के लिए एक ऐसी चाल चली है कि आपको भी गुस्सा आयेगा. आइए बताते हैं क्या है पूरा मामला.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी: (Image Source-ABPlive)

चीन ने नेपाल को भारत से अलग करने के लिए चली यह चाल

चीन भारत से दोस्ती बढ़ाने का एक ओर जहां ढोंग रच रहा है तो वहीं दूसरी ओर अपनी घटिया हरकत से बाज नही आ रहा है.  भारत को नीचा दिखाने के लिए अब उसने नेपाल का इस्तेमाल करना शुरु कर दिया है.  7 अगस्त को उसने नेपाल को अपने 4 बंदरगाह और तीन जमीनी पोर्टों का इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है. चीन का यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चारों ओर जमीन से घिरे नेपाल की निर्भरता इससे भारत पर कम हो जायेगी.

नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और शी जिनपिंग: (Image Source-Pubjabkesari)

नेपाल चीन के इन पोर्टों का इस्तेमाल कर सकेगा

खबर की मानें तो अब नेपाल चीन के शेनजेन, लियानयुगांग, झाजियांग और तियानजिन समुद्री पोर्ट का इस्तेमाल कर सकेगा. तियानजिन बंदरगाह नेपाल के सबसे नजदीक करीब 3000 किमी दूर है. इसके अलावा चीन ने अपने ड्राई पोर्ट लंझाऊ, ल्हासा और शीगाट्स को इस्तेमाल करने की अनुमति नेपाल की दी है. अंतराष्ट्रीय व्यापार के लिए नेपाल को अब ये पोर्ट वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध करायेंगे.

चीन का तियानजिन पोर्ट: (Image Source-Cruisemapper)

 

भारत मजबूत इरादों के साथ आगे बढ़ रहा है

चीन की यह चाल भारत के पड़ोसी देशों में उसके प्रभाव बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है. यह नेपाल को भारत से अलग करने की चीन की नई चाल है. चीन की चालों के बावजूद भारत अपने मजबूत इरादों के साथ आगे बढ़ता जा रहा है, ऐसी चालों का उस पर कोई खास प्रभाव पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है.

आपसे एक सीधा सवाल

चीन की भारत के प्रति मित्रता को आप कैसे देखते हैं?

News Source-NBT